Saturday, May 31, 2014

बदायूं गैंगरेपः बंद कर दो यह नौटंकी, नहीं चाहिए तुम्हारी हमदर्दी!!!

दिल बहुत रो रहा है...। जबसे बदायूं की खबर पढ़ी है, रात में ठीक से नींद नहीं आ रही है। वो खौफनाक दृश्य बार-बार आंखों के सामने आ जा रहा है...। कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्या होगा इस देश का...। इतना सख्त कानून बनने के बाद यह हालात हैं...। अब तो शर्म आ रही है, मुझे अपने आपको इस देश का नागरिक कहने में...। इस घटना को देखकर तो लगता है कि पूरी तरह से इंसानियत मर चुकी है। तभी तो इस तरह की हैवानियत आए दिन देखने और सुनने को मिल रही है।

बदायूं में रेप के बाद चचेरी बहनों का पेड़ पर लटका शव देखकर इंसानियत से नाता रखने वाले हर शख्स की आंख जरूर नम हुई होगी। इस घटना पर देश ही नहीं, वर्ल्ड मीडिया और संयुक्त राष्ट्र संघ को भी शर्म आ गई...। भले ही इस घटना पर देश शर्म कर ले, वर्ल्ड मीडिया शर्म कर ले, हमारे नेता शर्म कर लें...कोई कितना भी शर्म कर ले, लेकिन यह शर्म कुछ दिनों से ज्यादा नहीं रहेगी। दिल्ली में दामिनी गैंग रेप में भी सभी को शर्म आई थी, शर्म के मारे लोग सड़कों पर उतरे थे, देश की राजनीति को शर्म का एहसास करवाया था...तभी तो सरकार को भी शर्म का फील आया था। इस शर्मनाक घटना के चलते ही सरकार ने अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए एक कठोर कानून पर मुहर लगाई थी। दामिनी गैंग रेप केस में कोर्ट ने फटाफट फैसला भी सुना दिया, बावजूद इसके उन्हें कोई पश्चाताप नहीं। कोई डर नहीं...कोई शर्म नहीं...।


आज फिर वही हुआ। एक बार फिर देश-दुनिया को बदायूं गैंगरेप पर शर्म का बुर्का पहनते हुए देखा जा रहा है। हमारे नेता भी शर्म के मारे पानी-पानी हो रहे हैं। इस घटना पर उन्हें भी शर्म आ रही है। तभी तो कुछ नेता बेशर्मों की तरह शर्मनाक बयान भी दे रहे हैं। घटना पर पूछने पर नेताजी कह रहे हैं, अरे तुम तो सुरक्षित हो न...। अब अगर ऐसे बेशर्म नेता के हाथ में शासन की चाबी होगी तो निश्चित ही ऐसी शर्मनाक घटना तो होगी ही...। बेशर्म नेता...और शर्मनाक बयान...। ये लोग बेशर्मों की तरह इज्जत का सौदा भी करने से पीछे नहीं हैं...। जिस रेप की घटना को मीडिया ने हाईलाइट कर दिया, फौरन 05-10 लाख रु. मुआवजा देने का एलान कर देते हैं। अरे नेता जी, क्या इन पैसों से इज्जत वापस लाकर दे सकते हैं...। ऐसा करते इन्हें शर्म नहीं आ रही है। बेशर्म कहीं के...। चुल्लूभर पानी में डूब मरो...।


ऐसे नेताओं की अंतरात्मा से इंसानियत की आवाज तक नहीं निकल रही है...। तभी तो मुआवजे की रोटी फेंक रहे हैं। घटना के बाद, कुछ पुलिस वालों को बर्खास्त कर दिया, अरे इससे क्या उखाड़ लोगे नेताजी...। चार दिन बाद फिर से ये बहाल हो जाएंगे, फिर वही रेप की घटना...फिर वही थाने में दुत्कार की कहानी दोहराई जाएगी। इतना ही नहीं, बेशर्मों की तरह अब हर कोई छोटा-बड़ा नेता पीड़ित परिवार से मिलने पहुंच रहा है...। अरे भई काहे के लिए जले पर नमक छिड़क रहे हो...। तुम लोग तो अपने-अपने घर को चले जाओगे...। लेकिन क्या कभी पलटकर किसी ने उन पीड़ित परिवार की खबर ली, जिसकी बेटी रेप का शिकार हुई हो...। शायद कभी नहीं...।


इस परिवार को समाज किस गंदी नजर से देखता है, क्या कभी आपने जानने की कोशिश की है...। क्या किसी ने कभी पलटकर पूछा कि पीड़िता बेटी की शादी के लिए एक मां-बाप को किस कदर घर-घर जाकर गिड़गिड़ाना पड़ता है...। ऐसे परिवारों को समाज में उसको तिल-तिलकर दर्दभरी जिंदगी जीना पड़ता है...। दरिंदे तो एक बार इज्जत लूटते हैं, लेकिन उस पीड़िता और परिवार का यह समाज कई बार इज्जत लूटता है। बस चले आते हैं जख्मों पर मरहम लगाने...। बंद कर दो यह नौटंकी...। नहीं चाहिए तुम्हारी हमदर्दी। नहीं चाहिए तुम्हारी भीख...। अगर मुझे कुछ देना ही है तो हमारे दर्द पर राजनीति बंद कर दो...। हमारे जख्मों पर नमक छिड़कना बंद कर दो...। छोड़ दो मुझे अकेला...। आपके आने से उल्टा छीछालेधर होती है और जाने के बाद जिंदगी नासूर बन जाती है...। भगवान के लिए अगर करना ही है तो सारे नेता एक हो जाओ। समाज के ऐसे दंरिदों को शख्त से शख्त सजा दिलवाओ...। इनका फैसला कोर्ट में नहीं चौराहे पर करवाओ, जिंदा लटका दो इन्हें...। तिल-तिल कर ऐसे दरिंदों को सरेराह मौत की नींद सुला दो...। जब ऐसा घृणित कृत्य करने से पहले चौराहे की घटना को देखकर उस दरिंदे के रोंगटे खड़े हो जाएंगे, तब जाकर समाज और देश में बहन-बेटियों की इज्जत बच पाएगी वरना...।

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